| पुस्तक क्र. | विषय | पुस्तकाचे नाव | लेखक | प्रकाशक | पान | |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 15562/42 | अध्यात्म | गीतार्थसार | वामन आबाजी मोडक | गणपत कृष्णाजी छापखाना | 88 | |
| 15559/39 | अध्यात्म | गीतार्थबोधिनी ह्मणजे मूळगीतेवर समश्र्लोकी, आर्या, दोहा, अभंग अशा पांच प्रकारच्या टीका आहेत | रावजी श्रीधर गोंधळेकर | जगद्धितेच्छु छापखाना | 353 | |
| 15558/38 | अध्यात्म | गीतार्थबोधिनी | काशिनाथ वासुदेव खांडेकर | नारायण रामचंद्र सोहनी | 427 | |
| 22821/245 | अध्यात्म | गीतार्थचर्चा | ग.वि.केतकर | अधिकारी प्रकाशन | 169 | |
| 17142/559 | काव्य | गीतार्णव | मोरोपंत | - | 164 | |
| 11506/200 | धर्म | गीतारहस्याची अपूर्वता | बालशंकर देशपांडे | श्रीराम प्रकाशन | 147 | |
| 15709/76 | अध्यात्म | गीतारहस्यांतील विषयांची प्रकरण: अनुक्रमणिका | 0 | 0 | 856 | |
| 16064/214 | अध्यात्म | गीतारहस्यसार | वालचंद्र रामचंद कोठारी | सी.एच्.गांधी | 128 | |
| 16144/247 | अध्यात्म | गीतारहस्य-बोध | दा.न.शिखरे | दा.न.शिखरे | 138 | |
| 15701/69 | अध्यात्म | गीतारहस्य टीकात्मक निबंध | बालचंद रामचंद कोठारी | बालचंद रावजी गोंधळेकर | 75 |