| 11927/83 | पौराणिक | विक्रमचरित्रप्रारंभ | 0 | 0 | 500 |
| 15511/537 | पौराणिक | सार्थ श्रीवाल्मिकी रामायण सुंदरकांड युद्धकांड सर्ग 1 ते 75 खंड तिसरा | प्र. न. जोशी | विदर्भ मराठवाडा बुक कंपनी | 700 |
| 11928/84 | पौराणिक | अभंग | तुकारामकृतबाळक्रीडेचे | - | 58 |
| 15512/538 | पौराणिक | श्रीवाल्मिकी रामायण खंड चौथा युद्धकांड उत्तराखंड सर्ग 76 ते अखेरपर्यंत | प्र. न. जोशी | विदर्भ मराठवाडा बुक कंपनी | 700 |
| 11929/85 | पौराणिक | चित्ततरंग | गंगूबाई वैध | श्री. कृ.मा. बक्षी | 84 |
| 15513/533 | पौराणिक | आदिशक्तिचे विश्वस्वरूप अर्थात् देवीकोश खंड 3 रा | प्रल्हाद कृष्ण प्रभुदेसाई | शि.ह.धुपकर आणि वा.बा. भागवत | 525 |
| 11930/87 | पौराणिक | कादंबरी कथा | डॉ. के.ना.वाटवे | केदार प्रकाशन | 77 |
| 13978/309 | पौराणिक | संतसंग | प्र.न.जोशी | मॅजेस्टिक बुक स्टॉल | 80 |
| 15514/534 | पौराणिक | श्री ज्ञानेश्वरी अध्याय नववा | लक्ष्मण विश्वनाथ कर्वे व गोपाळ पुरूषोत्तम रिसबूड | गो.पु. रिसबुड | 392 |
| 11931/88 | पौराणिक | पौराणिक स्त्रियांच्या रम्य कथा प्रथम खंड | प्रा.म.दा. साठे | संजय प्रकाशन | 104 |