| 15519/544 | पौराणिक | महाभारत खंड 5 वा | डॉ. य.स. वाळिंबे | विदर्भ मराठवाडा बुक कंपनी | 660 |
| 22687/373 | पौराणिक | श्री गणेश दर्शन | मनोहर जोशी | प्रसाद प्रकाशन | 270 |
| 12704/200 | पौराणिक | श्रीमन्महाभारत | 0 | 0 | 635 |
| 15520/547 | पौराणिक | महाभारत खंड 8 वा | डॉ. रा.शं. वाळिंबे व डॉ. य.स. वाळिंबे | विदर्भ मराठवाडा बुक कंपनी | 684 |
| 22688/998 | पौराणिक | श्री महाभारत कथा | त्र्यम्बक गणेश बापट | कोन्तिनान्तल प्रकाशन | 422 |
| 11937/92 | पौराणिक | रामदासंचीं भजनें बोध-बिंदु आणि मनाचीं शतें | विनोबा | परंधाम प्रकाशन | 212 |
| 12705/206 | पौराणिक | दासबोध (Desabodha) | डा. वी.एस. कानविंदे | जयश्री प्रकाशन | 216 |
| 15521/549 | पौराणिक | महाभारत खंड 10 वा खिलपर्व : हरिवंश पूर्वार्ध | रा.शं. नगरकर व पंडित दा.प्र. पाठकशास्त्री | विदर्भ मराठवाडा बुक कंपनी | 650 |
| 22689/532 | पौराणिक | कर्मपुराण | प्र.न.जोशी | प्रसाद प्रकाशन | 319 |
| 12706/300 | पौराणिक | महाराष्ट्रवेदग्रंथमाला एकनाथ | श्रीयुत गोविंद गोपाळ टिपनीस | मनोरंजन छापखाना | 447 |