| पुस्तक क्र. | विषय | पुस्तकाचे नाव | लेखक | प्रकाशक | पान | |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 4835/1426 | निबंध | समर्थ रामदास | य.दि.पेण्टरकर | अ.अं.कुलकर्णी | 267 | |
| 4834/1427 | निबंध | संत वाङ्मयाची सामाजीक फलश्रुति | प्रा.गं.बा.सरदार | महाराष्ट्र साहित्य परिषद | 144 | |
| 4833/1428 | निबंध | पारिजात | वि.स.खांडेकर | अ.अं.कुलकर्णी | 167 | |
| 4832/1429 | निबंध | पारिजात | भी.कुलकर्णी | अ.अं.कुलकर्णी | 167 | |
| 4831/1430 | निबंध | माझें चिंतन | डा.पु.ग.सहस्त्रबुध्दे | न.श.कुलकर्णी | 192 | |
| 4830/1431 | निबंध | नवी घडी-नवे जीवन | श्री.वा.काले | किर्लोस्कर प्रेस | 94 | |
| 4829/1432 | निबंध | साहित्यांतील विवेक | अ.ना.देशपांडे | अ.ज.प्रभु | 164 | |
| 4828/1433 | निबंध | भारतीय काव्यशास्त्राचे मूल प्रश्न | डॉ.नरेन्द्र | सुविचार प्रकाशन मंडल | 256 | |
| 4827/1434 | निबंध | परंपरा आणि नवता | गो.वि.करंदीकर | ग.रा.भटकल | 238 | |
| 4826/1435 | निबंध | कादंबरी | ल.ग.जोग | दे.श्री.जोशी | 164 |